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Mahakumbh Stampede: महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर भगदड़ मचने से 30 की मौत हो गई। मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। राहत व बचाव कार्य शुरू है। महाकुंभ के अस्पताल में घायलों को लेकर आने वाली एंबुलेंस का तांता लगा हुआ है। राहत और बचाव कार्य में पूरा प्रशासन जुटा हुआ है। दर्दनाक हादसा रात करीब दो बजे संगम तट के पास हुआ।

महाकुंभ में मंगलवार रात भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। इसमें 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हैं। प्रशासन का कहना है हालात नियंत्रण में हैं।

घटना के बाद महाकुंभ में क्राउड डायवर्जन प्लान लागू कर दिया गया है। शहर के बाहर ही श्रद्धालुओं के जत्थों को रोका गया। 10 से ज्यादा जिलाधिकारियों को क्राउड मैनेजमेंट जिम्मेदारी दी गई है। भीड़ को काबू में करने के लिए प्रयागराज के बॉर्डर के इलाकों में अधिकारियों को सक्रिय किया गया है।

प्रशासन ने तीर्थयात्रियों अपील

भगदड़ हादसे के बाद सभी तीर्थयात्रियों से अपील की गई है कि संगम की ओर आने की कोशिश न करें। दूसरे घाटों पर स्नान करें।

कृपया बच्चों को कंधे पर बैठाएं

बार-बार माइक से यह भी अनाउंस किया जा रहा है कि श्रद्धालु अपने बच्चों को कंधे पर बैठा कर चलें। किसी को धक्का न मारें। धीरे-धीरे आगे बढ़ें।

अमृत स्नान स्थगित

कुंभ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर संगम तट पर भगदड़ की घटना सामने आई। इस हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत की सूचना है। वही, कई घायल हो गए है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद ने अखाड़ों से अपील की कि अमृत स्नान फिलहाल स्थगित कर दें।

वैकल्पिक मार्गों से निकाले जा रहे श्रद्धालु

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने इस अपील पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि हम प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे ऊपर है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए संगम जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है।

NSG कमांडो ने मोर्चा संभाल

घटना के बाद NSG कमांडो ने मोर्चा संभाल लिया। संगम नोज इलाके को एंट्री बंद कर दी। प्रयागराज में भीड़ और न बढ़े, इसलिए प्रयागराज की सीमा वाले सभी जिलों में श्रद्धालुओं को रोकने के लिए अधिकारियों को मुस्तैद कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखाड़ों से की बात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अखाड़ों से बात की है। इससे अखाड़ों ने अमृत स्नान टाल दिया। श्री महानिर्वाणी और अटल अखाड़ा को सुबह 5 बजे अमृत स्नान करना था। इसके बाद निरंजनी और आनंद अखाड़ा स्नान करते। फिर जूना, अग्नि, आवाहन और किन्नर अखाड़ा के स्नान का समय था। इनके बाद वैष्णव संप्रदाय के दिगंबर अनी, निर्मोही अनी और निर्वाणी अनी स्नान करते। सबसे लास्ट में निर्मल अखाड़ा का अमृत स्नान था।

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